एक IITian की पहल से लाखों बच्चों को मिल रहा फ्री भोजन |

हम आपको जा रहें है एक IITian के बारें में जिनके एक पहल से आज लाखों बच्चों को भोजन मिल रहा है|

Update: 2022-05-18 08:09 GMT

हम आपको जा रहें है एक IITian के बारें में जिनकी एक पहल से आज लाखों बच्चों को फ्री भोजन मिल रहा है| इस महान व्यक्ति का नाम मधु पंडित दास है | इनके एक एनजीओ द्वारा आज देशभर के लाखों स्कूली बच्चों को खाना खिलाया जा रहा  है | एक समय था जब ये अपनी जिंदगी को ख़त्म करना चाहते थे पर ऐसा कर नहीं सके | बाद में उनको श्रीला प्रभुपाद की  किताबों से प्रेरणा मिली | इनका मन अध्यात्म की ओर बढ़ने लगा और ये श्रीकृष्ण भक्त हो गए | उन्हें भारत सरकार के द्वारा 'पद्म श्री' सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है |

मधु पंडित दास का जीवन परिचय – इनका जन्म भारत राज्य के तमिलनाडु के नागरकोइल में 1956 को हुआ था | इन्होने मुंबई IIT से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक डिग्री प्राप्त की है |जब वे मुंबई में पढ़ रहे थे, तब इन्हें राष्ट्रिय प्रतिभा खोज के लिए चुना गया था | इनका असली नाम मधुसूदन सो था बाद में मधु पंडित दास बन गए |

एनजीओ अक्षयपात्र का गठन - एक बार की बात है जब वे अपने घर में खिड़की के पास खड़े थे तभी बाहर देखा कि रोटी के एक टुकड़े के लिए एक बच्चे और कुत्ते में लड़ाई हो रही है | इस घटना ने इनके ह्रदय को अंदर से झकझोर दिया | उसी वक्त इन्होने अपने मन में ये सोच लिया कि हम एक ऐसी पहल करेंगे, जो कि इस्कान मंदिर के 20 किलोमीटर के दायरे में कोई बच्चा भूखा नहीं रहेगा | उनके इसी विचार से अक्षयपात्र का जन्म हुआ | इसके बाद इस्कॉन मंदिर से बच्चों को भोजन दिया जाने लगा | देखते ही देखते बहुत से बच्चे  खाना खाने के लिए आने लगे | एक दिन पंडित जी ने देखा की बच्चे खाना, मिलने के समय से पहले ही आ जाते है, खाना खाने के लिए बच्चे या स्कूल छोड़ देते है, या बीच में ही छोड़ कर आ जाते है | साल 2000 में पंडित जी से मिलने इनफ़ोसिस के सी.एफ.ओ मोहन दास आये तब पंडित जी ने इस बात की चर्चा की | इसके जवाब में मोहन दास ने कहा क्यों न स्कूल में ही भोजन भेजा जाय | इस बात पर पंडित जी ने अमल किया और खुद ही पास के स्कूल में खाना लेकर जाने लगे, और बच्चों को खाना खिलाने लगे |

इस निःस्वार्थ कार्य की महत्ता तब समझ आई जब कई अन्य स्कूलों के प्राचार्यो ने  पंडित जी से अनुरोध किया कि वे हमारे बच्चों को भी खाना उपलब्ध करायें | इस बात को ध्यान में रखते हुए पंडित जी ने नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति के सहयोग से अक्षयपात्र की रसोईं का निर्माण करवाया और इस रसोईं से भोजन बन कर स्कूलों तक जाने लगा | स्कूल तक भोजन बन कर पहुचने में साढ़े पांच रूपये की लागत आती थी | शुरू के दिनों में सारा खर्च संस्था ही उठाती थी बाद में सरकार के द्वारा भी इस संस्था को मदद मिलने लगी | एक छोटे से प्रयास और शुरुआत ने आज भारत के 7 राज्यों में लगभग 6500स्कूलों में 15लाख बच्चों को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा रहा है, अक्षयपात्र | 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी तथा गैर सरकारी स्कूलों में मध्याह्न-भोजन को अनिवार्य कर दिया गया | आज ये संस्था देश के जरूरी चुनौतियों पर काम कर रहा है जिसमें शिक्षा और भोजन शामिल है | ये संस्था बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहा है और उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दे रहा है |


पंडित जी को सम्मान और पुरस्कार – मधु पंडित दास को बच्चों के लिए अक्षयपात्र फाउंडेशन के द्वारा विशष्ट सेवा के लिए 67 वे गणतंत्र दिवस पर पद्म श्री सम्मान से सम्मनित किया गया | उन्हें नेशनल लिविंग लिजेंड अवार्ड से नवाजा गया है | 2010 में उन्हें IIT मुंबई के द्वारा विशष्ट पूर्व छात्र का पुरस्कार दिया गया | उन्हें साल 2019 में गरीब बच्चों को निःशुल्क भोजन के लिए उनके दिए योगदान को देखते हुए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार मिला |

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