कभी करती थीं साधारण टीचर की नौकरी, आज हैं 22 हजार करोड़ की मालकिन

ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म बायजूस(BYJU'S) की हैं को-फाउंडर

Update: 2022-07-17 02:45 GMT

जब से दुनिया में डिजिटल का दौर शुरू हुआ हैं, तभी से हमें देश के किसी भी कोने में बैठ कर इंटरनेट के माध्यम से कुछ भी सिखने और पढ़ने में आसानी हो गई हैं| साथ ही पहले ज्यादा फ़ीस की वजह से जो बच्चे बड़े इंस्टीट्यूट में जाकर नहीं पढ़ पाते थे उन संस्थानों के टीचर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जुड़कर पहले की तुलना में काफी कम फ़ीस में ऑनलाइन माध्यम द्वारा पढ़ा रहें हैं| और बच्चे अपने घर से पढ़ कर सफल हो रहें हैं| आज हम आपको एक सफल टीचर के बारें बताने जा रहे हैं| जिनका नाम दिव्या गोकुलनाथ हैं जो ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म बायजूस की को-फाउंडर हैं| एक समय था जब दिव्या एक साधारण टीचर थीं| लेकिन आज वह भारत की सबसे कम उम्र की दूसरी सबसे अमीर महिला हैं| दिव्या बायजूस कंपनी को शुरू करने वाले रविन्द्रन की पत्नी है| आज दिव्या मात्र 34 वर्ष की हैं| और उनकी कुल संपत्ति 22 हजार करोड़ से ज्यादा है|


कोचिंग में हुई रविन्द्रन से मुलाकात- रविन्द्रन जब कोचिंग पढ़ाते थे, उसी समय दिव्या एक छात्र के तौर पर उनमे ट्यूशन पढ़ने आती थी| लेकिन बाद में उन दोनों ने शादी कर ली| और दोनों ने मिलकर बायजूस को नई उचाईयों पर पहुचाया है| साल 2011 में गणित के टीचर रविन्द्रन ने बायजूस की शुरुआत की थी| वहीँ आज रविन्द्रन फ़ोर्ब्स की सूची में भारत के सबसे कम उम्र के तीसरे अरबपति है| दिव्या इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं|

कैसे हुई BYJU'S की शुरुआत- बायजूस रविन्द्रन का जन्म केरल के ओझिकोड के एक शिक्षक परिवार में हुआ था| उनके पिता एक स्कूल में फिजिक्स पढ़ाते थे और उनकी माँ मैथ पढ़ाती थी| बायजूस रविन्द्रन ने शुरूआती पढाई के बाद अपनी इंजीनियरिंग पूरी की और  उसके बाद वह विदेश जाकर नौकरी करने लगे| साल 2003 में बायजूस रविन्द्रन ने 2 महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे| बायजूस को भी अपने माता-पिता की तरह पढ़ाने का शौक बचपन से ही था| इसलिए वह अपनी छुट्टियों में MBA की तैयारी कर रहे अपने दोस्तों के कॉन्सेप्ट क्लियर करने में मदद करने लगे| उसी दौरान उनके मन में यह ख्याल आया कि क्यों न मै भी MBA एंट्रेंस की परीक्षा दूँ| उसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ MBA की परीक्षा दी| जब रिजल्ट आया तो उन्होंने देखा कि उनको 100 पर्सेंटाइल मिले हैं| फिर उन्हें लगा कि तुक्का लग गया होगा| उन्होंने अगली बार फिर से परीक्षा दी और इस बार भी उन्हें 100 पर्सेंटाइल मिले| जिस परीक्षा को पास करने के लिए लड़के अपनी जी जान लगा देतें हैं| उस परीक्षा को बायजूस बड़ी आसानी से पास कर ले रहें थे| इस बात से उनके दोस्त हैरान थे| फिर उनके दोस्तों ने कहा कि क्यों न यही रुक कर बच्चों के पढ़ाने का काम करो| फिर बायजूस ने अपने शौक और दोस्तों की सलाह पर| दो बच्चों से पढ़ाने की शुरुआत की| जिन दो बच्चों को बायजूस पढ़ाते थे, उनका रिजल्ट बहुत अच्छा आया| उसके बाद उनके ट्यूशन क्लास में बच्चें बढ़ने लगे| और 2007 तक उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई की उनके पास 1 हजार बच्चे हो गए| जिसके बाद उन्हें ऑडिटोरियम में क्लास लेने लगे बायजूस ने केरल के 9 शहरों में क्लास लेना शुरू किया| और 2007 से 2009 तक ऐसे ही चलता रहा| समय के साथ बायजूस की भागदौड़ बढ़ने लगी तो उन्होंने एक आइडिया निकला की क्यों न वीडियो के जरिये बच्चों को पढ़ाया जाए इसके बाद से बायजूस वीडियो से पढ़ाने लगे|


2011  लांच किया ऐप- बायजूस रविन्द्रन पहले MBA और IIT की तैयारी करने वाले बच्चों को पढ़ाते थे| फिर उनके दिमाग में एक आइडिया आया कि क्यों उनके साथ ही छोटे बच्चों को भी एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म दिया जाए जिससे जुड़कर 1 से लेकर 12वीं तक के बच्चे भी पढ़ सके| उसके बाद उन्होंने रिसर्च की तोउन्हें पता चला कि देश में कुल 25 करोड़ से ज्यादा बच्चे हैं जो 1 से लेकर 12 तक की क्लास में पढ़ते हैं| और इस मार्केट की तरफ किसी का फोकस भी नहीं है| उसके बाद उन्होंने साल 2011 में थिंक एंड लर्न(Think and Learn) के नाम से एक ऐप लाँच किया। ऐप को लाँच करने के बाद बायजू को अपनी सोच को एक प्रोडक्ट के रूप में तैयार करने में चार साल का वक्त लगा। और फिर साल 2015 में BYJU'S ऐप लॉन्च हुआ| और उनके स्टार्टअप की तरक्की को पंख लग गए। ऐप लाँच के 3 महीने के अंदर ही उनसे 20 लाख स्टूडेंट जुड़ गए| उसके बाद उन्होंने पढ़ाई के तरीके और पढ़ाई के स्टाइल पर भी निवेश किया। BYJU's ने अपने पढ़ाई को आसान, और मजेदार बनाने के लिए एक्सपर्ट टीचर्स भर्ती किए, जो कठिन कॉन्सेप्ट को आसान बना कर बच्चों को समझा सकते थे। इन टीचर्स ने ग्राफिक डिजाइनर्स और वीडियोग्राफर्स के साथ मिलकर 5 से 15 मिनट के डेमो वीडियो तैयार किए। और उस वीडियो को बच्चों के साथ ही पेरेंट्स को फ्री में दिखाए| जिनको कॉन्सेप्ट समझ में आता| वह पैसे देकर ऐप पर पढ़ाई करने लगते| एक साल बीतते-बीतते उनका ऐप देश भर के बच्चों का पसंदीदा ऐप बन गया| और इसी साल उन्हें सिक्वा कैपिटल और सोफिना चेन जुकरबर्ग से 921 करोड़ रूपये की फंडिंग मिली| उसके बाद बायजूस ने अपनी कंपनी को बढ़ाने के लिए देश की लर्निंग कई कम्पनियों का अधिग्रहण कर लिया| उनमे एपिक गेम्स, टॉपर, ग्रेट लर्निंग, हश लर्न, स्कॉलर, व्हू दैट और ग्रेडअप आदि शामिल हैं| आज उनकी कपंनी में 1000 से ज्यादा लोग काम करते हैं| अगर उनके नेटवर्थ की बात की जाए तो पेटीएम को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे ज्यादा वैल्यू वाला स्टार्टअप बन गया है| वर्तमान में बायजूस की कुल संपत्ति लगभग 42 हजार करोड़ की हैं|


साल 2008 से दिव्या ने टीचिंग से शुरू किया करियर- दिव्या ने अपने करियर की शुरुआत साल 2008 से की| उसके पहले वह रविन्द्रन से मैथ की ट्यूशन पढ़ती थीं| दिव्या ने बताया कि जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया तो उन्होंने देखा जिन बच्चों को वह पढ़ा रहीं हैं| वह उनसे कुछ ही साल छोटे हैं| इसलिए ज्यादा परिपक्व दिखने के लिए दिव्या साड़ी पहन कर क्लास लेने जाती थी| दिव्या ने जब GRE(Graduate Record Examinations) को पास किया तो उन्हें दुनिया के कई विश्वविद्यालय में पढ़ाने के लिए ऑफर आया| लेकिन दिव्या ने अपने देश में रहकर अपने पति रविन्द्रन के साथ काम करने का फैसला किया|

दिव्या टीचिंग के लिए हैं प्रतिबद्ध- दिव्या गोकुलनाथ का कहना है कि उन्हें टीचिंग से प्यार है| इसलिए उन्होंने विदेश में नौकरी करने के बजाय अपने देश में रहकर देश के बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को सवांरना उचित लगा| विदेश न जाने की एक वजह और हैं, कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं| और वह अपने माता-पिता के पास में ही रहना चाहतीं हैं| उनका पूरा परिवार बैंगलोर में रहता हैं| रविन्द्रन से शादी के बाद उन्होंने दो बेटों को जन्म दिया| दिव्या के टीचिंग के प्रति प्रतिबद्धयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, जब उनके बड़े बेटे का जन्म हुआ और वह मातृत्व अवकाश पर थी| बावजूद उसके वह जब उनका बेटा सो जाता तो वह बच्चों का नुकसान न हो इसलिए वीडियो रिकार्ड करतीं थीं|


कंटेंट पर रहता है फोकस- दिव्या ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका पूरा फ़ोकस बायजूस के कंटेंट पर रहता हैं| वह बच्चों को ऐसा कंटेट देना चाहती हैं जिसको पढ़कर उन्हें ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सके| दिव्या का मुख्य उद्देश्य रहता है कि देश के हर कोने में बैठे छात्र को मैथ में कोई दिक्कत ना हो और आसानी से समझ आ सके| काम और गृहस्थ जीवन के बीच संतुलन के बारें में जब उनसे पूछा गया| तो उनका कहना है कि जब आप किसी भी काम को पूरे मन के साथ करतें हैं तो वह आपकी जिंदगी बन जाता है| और आपको ऐसी सफलता मिलती हैं जिसकी आप सपने में भी कल्पना नहीं कर सकते|

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